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शैतान शासक की आकुल आत्मा का ‘चुपचाप अट्टहास’

किसी देश की जनता के लिए यह जानना हमेशा दिलचस्प (और जरूरी भी) होगा कि उस देश की सत्ता के शिखर पर बैठा शैतान अगर कभी स्वयं से बतियाता होगा तो कैसे? उसके ‘मन’ की बात क्या होगी? वह ‘मन की बात’ नहीं जो वह रेडियो, टेलीविज़न से प्रसारित करवाता है। क्योंकि वह तो एक रिकॉर्डेड अभिनय है, यह जनता को खूब पता होता है। अपने छल, प्रपंच, कपट, अत्याचार, अनाचार को स्वयं के सामने वह कैसे और किन शब्दों में जस्टीफाई करता होगा।ज़ुल्म और फ़रेब से भरे अपने दिमाग़ का इस्तेमाल लोगों के दिमाग़ों पर कब्ज़ा करने को प्रतिबद्ध शैतान के एकालाप से लेकर शासक के रूप में जनता के साथ संवाद और विवाद की तीखी छवियां समर्थ कवि लाल्टू ने अपने नए कविता-संग्रह ‘चुपचाप अट्टहास’ की कविताओं में अंकित की हैं। संग्रह की सभी कविताएं एक ही शृंखला की कड़ियां हैं, शायद इसीलिए कवि ने हर कविता को अलग-अलग शीर्षक न देकर क्रम संख्या के आधार पर रखा है।

इस किताब की भूमिका में नन्दकिशोर आचार्य ने कवि लाल्टू; और इस संग्रह की कविताओं के बारे में बहुत महत्वपूर्ण बात की तरफ ध्यान दिलाया है। वे लिखते हैं – “लाल्टू की कविताई इस बात में है कि उनका काव्य-वाचक …